“मत कहो उन्हें चमार,”
हिंदू धर्म को अपना,
हरिजन कहलाना जिन्होंने किया स्वीकार।
तुम, मत कहो ,
उन्हें चमार ।
मत कहो ,
उन्हें चमार।
तुम नहीं जानते क्या-क्या न बलिदान किया क्या-क्या न
देश पर वार दिया
अपना धर्म
अपना कर
ग़ैर का धर्म न स्वीकार किया।
या तो भी विधर्मी हो जाओ,
या बनो हरिजन,
प्रश्न था बड़ा और सख्त,
देश ,धर्म ,स्थिति, नियति ,
सब कुछ बवंडर जैसा था,
उस वक्त,
हिंदू स्वधर्म को अपना
हरिजन कहलाना जिन्होंने किया स्वीकार,
मत कहो उन्हें
चमार।
देश हमारा बड़ा है धर्म हमारा बड़ा है बड़ी है हमारी संस्कृति,
क्या फर्क बने अगर कोई शबरी केवट या मिले और कोई पद भी,
सभी राम के हैं
गीत यह हनुमान के हैं
हम ना छोड़ेंगे राम कहना
कृष्णा कहना
चाहे जितना जोर लगा लो ,
सह लेंगे,
सब सह लेंगे।
विधर्मी होने से तो मरना अच्छा लगता, चाहे तो चमार कह लो,
हमें तो देश में,
राम ही सच्चा लगता ।
ऐसे देश -वासी को सिर्फ ‘चमार,’ समझना हमारी कितनी बड़ी भूल है, इतिहास याद दिला रहा ,
राम के राज्य में ,
सब राम के ही फूल हैं,
करो दिल से ,
अब स्वीकार।
मत कहो उन्हें चमार,
स्व हिंदू धर्म को अपना
हरिजन कहलाना जिन्होंने किया स्वीकार
मत कहो उन्हें चमार।