सत्यनारायण की कथा
सत्यनारायण की कथा
सत्य के सूर्य की स्थापना करती है।
जीवन के सभी असत्यों पर
विजय की घोषणा करती है।
ईश्वर अंतर्यामी हैं,
पग-पग पर एहसास कराती है।
अंतर्यामी से डरो, यह भी सिखलाती है।
सत्य सामने आएगा,
वरना साहूकार का बेड़ा डूब जाएगा।
राजा और रंक में कोई अंतर नहीं,
ईश्वर के खिलौने हैं सब
कहीं कोई बहुत कुछ
तो कहीं कोई कुछ भी नहीं
मत इठलाओ,
मत भूल जाओ,
मत धन पर कब्जा जमाओ।
वरना पूरी जहाज पर
सिर्फ लता और पत्र पाओ।
सारी बातें एक ओर ही इशारा करती हैं—
“सत्य ही विजय है,
विजय वहीं, जहां सत्य है।”
“यत्र योगेश्वर: कृष्ण:
यत्र पार्थो धनुर्धर:।
तत्र श्रीर्विजयो भूति:
ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।”
यही कथा सत्यनारायण की,
सत्य के सूर्य की स्थापना करती है।